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गाँधी जी वाली गलती

Posted On: 3 Sep, 2011 में

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 शुक्रवार दिनांक २ सितम्बर २०११ के दैनिक जागरण के अंक में श्री एस.शंकर  जी का  अन्ना जी के आन्दोलन से संबंधित  लेख ” गाँधी जी वाली गलती” पढ़ा | लेख में शंकर जी ने अन्ना टीम द्वारा इमाम  बुखारी के पास जाकर  आन्दोलन में गूंज रहे नारों के प्रति स्पष्टीकरण देने पर आपत्ति जताई है | अन्ना जी के आन्दोलन को सफल बनाने में अन्ना टीम के सदस्यों का विशेष योगदान रहा है |  आन्दोलन के दौरान अपनाये गए  दो नारों बंदे  मातरम , तथा भारत माता की जय के कारण इमाम बुख़ारी  ने अन्ना आन्दोलन को इस्लाम विरोधी बताया | और इस पर  अन्ना टीम  के सदस्यों का इमाम बुख़ारी से मिलकर इस विषय पर स्पष्टीकरण देने का कोई ओचित्य समझ में नहीं आता | उपरोक्त कारणों के लिए  अन्ना आन्दोलन को इस्लाम विरोधी बताना अत्यंत खेद  जनक है| इस तरह तो  ब्रिटिश  राज के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम भी इस्लाम विरोधी था क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम में भी ये नारे प्रमुख थे |
                                अन्नाजी के आन्दोलन में एक और नारा भी बहुत गूंजा था “  अन्ना जी के चार सिपाही - हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई “  और इस बात में कोई संदेह नहीं कि अन्नाजी के आन्दोलन से हर वर्ग हर जाती के लोग जुड़े थे और आम मुस्लिम समुदाय भी इस से पूरी तरह जुड़ा हुआ था |अनेक मुस्लिम भाई राम लीला मैदान में नमाज़ अदा करते थे और और  रात्रि को रोज़ा तोड़ते थे | उसी समय बुख़ारी जी ने आन्दोलन को इस्लाम विरोधी बता मुसलमानों को को आन्दोलन से दूर रहने को कहना क्या दर्शाता है | बुख़ारी जी  नहीं चाहते कि हिन्दू- मुसलमान मिल कर रहे शायद उन्हें इससे मुसलमानों पर अपना शिकंजा कमजोर होने का अंदेशा हो | बुख़ारी  जी ने  चाहे जिस सोच से अन्ना  आन्दोलन को इस्लाम विरोधी बताया हो अन्ना टीम का  उनके पास जाकर स्पष्टीकरण  देना बिलकुल गले नहीं उतरता |

सुभाष वाधवा



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rahulpriyadarshi के द्वारा
September 4, 2011

जी,बिलकुल आपकी चिंता वाजिब है,मैं भी इस बात को लेकर उहापोह में हूँ की आखिर क्यूँ टीम अन्ना इतना सेकुलर होने का प्रमाणपत्र लेना चाहती है.

    subhash wadhwa के द्वारा
    September 4, 2011

    प्रिये प्रियदर्शी खुश रहो , प्रितिक्रिया के लिए धन्यवाद, हमारे देश का हर नेता अपने आप को सेकुलर बताना चाहता और ऐसा सेकुलर जो केवल अल्पसंख्यको के हित की बात करे | और इसके साथ साथ यदि वह बहुसंख्यंको कट्टरपंथी कह सके तो प्रगतिशील विचारों वाला कहलाता है | शायद इससे से उन्हें अपनी राजनीति की दुकान अच्छी चलती दिखती है |


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